हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन केन्द्र

भाषा केवल अभिव्यक्ति एवं संपर्क का माध्यम ही नहीं है बल्कि वह सामाजिक सोच, सामासिक संस्कृति और सामूहिक मानसिकता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत जैसे एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश की राजभाषा एवं संपर्क भाषा होने के साथ-साथ हिन्दी विभिन्न भाषा-भाषी समाजों और संस्कृतियों के बीच अंतः संवाद का माध्यम भी है। गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय का हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन केन्द्र शैक्षिक एवं सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ उपेक्षित समूहों को केन्द्र में लाने की प्रक्रिया में हिन्दी भाषा एवं साहित्य की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।

पाठ्यक्रम : हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन केन्द्र द्वारा एम.फिल.-पीएच.डी.(एकीकृत) तथा एम. ए. हिन्दी पाठ्यक्रम संचालित है। विगत दशकों में रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी के विद्यार्थियों के लिए विकसित हुए नये अवसरों को ध्यान में रखकर हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन केन्द्र ने अपने एम.ए. पाठ्यक्रम का निर्माण किया है | उक्त दोनों पाठ्यक्रम अपने स्वरूप एवं प्रकृति में अन्तर-अनुशासनात्मक हैं। इन पाठ्यक्रमों में स्त्री, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक तथा हाशिये के समाज पर केंद्रित साहित्य की विविध विधाओं, आधुनिक साहित्य सिद्धांतों, तुलनात्मक साहित्य, लोक साहित्य, संस्कृति, सिनेमा, प्रयोजनमूलक हिन्दी, अनुवाद एवं मीडिया अध्ययन आदि विषयों पर विशेष जोर दिया गया है |

अकादमिक गतिविधियाँ : हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन केंद्र भाषा एवं साहित्य से संबंधित अधुनातन विषयों पर अतिथि व्याख्यानमालाओं, राष्ट्रीय परिसंवादों / संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का नियमित आयोजन करता रहता है| अकादमिक महत्व के राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में विद्यार्थियों को अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने तथा शोध आलेखों को प्रकाशित कराने के लिए सतत मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन दिया जाता है| विद्यार्थियों की रचनाशीलता एवं शोध वृत्ति को मंच प्रदान करने के लिए केंद्र आगामी अकादमिक वर्ष से अपनी पत्रिका का प्रकाशन करने जा रहा है|

प्रवेश अर्हता : हिन्दी भाषा एवं साहित्य तथा अन्य संबंधित समकक्ष विषयों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर अभ्यर्थी क्रमशः एम.ए. तथा एम.फिल.-पीएच.डी. पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रवेश पा सकते हैं| एम.फिल.-पीएच.डी. पाठ्यक्रम में प्रवेश के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार परीक्षा भी देनी होगी|